गोलाकोट का इतिहास!

गोलाकोट का इतिहास!

आज हम आपको गोलाकोट के इतिहास से अवगत कराते है

○ श्री दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र तीर्थोदय गोलाकोट जी गोल आकार पहाड़ी पर बना हुआ है। इसीलिए इस मंदिर को गोलाकोट जी कहा जाता है। यह मंदिर खनियाधाना से 8 किलोमीटर दूर दक्षिण दिशा में बुंदेलखंड विंध्याचल पंच पर्वतों के मध्य स्थित है। श्री तीर्थोदय गोलाकोट मंदिर जैन समाज के लिए अतिविशिष्ट स्थान रखता है। यही कारण है कि यहां जैन मुनियों और संतों का आवागमन लगा रहता है। चातुर्मास के दौरान भी हमारे पूज्य संतों ने इस पावन धरा को पवित्र किया है। तलहटी से 264 सीढ़ियां चढ़ने के उपरांत गोलाकोट मंदिर जी पहुंचा जा सकता है। यहां पर मंदिर जी तक जाने के लिए छोटे-बड़े वाहन सड़क मार्ग से बड़ी आसानी से जा सकते हैं। यहां पर 24 वे तीर्थंकर श्री महावीर स्वामी की पूर्व की श्री आदिनाथ पार्श्वनाथ भगवान तक की कई प्राचीन मूर्तियां मंदिर जी में मौजूद हैं। यहां के इतिहास के बारे में बताया जाता है कि इस पहाड़ी पर दिगंबर जैन समाज के देदामोरी गोत्र के लगभग 700 परिवार निवास करते थे। यहां पर स्थानीय जैन समाज के प्रयासों से निर्मित 900 कुएं एवं 89 बावरियों के मौजूद होने के प्रमाण भी मिलते हैं। यहां विराजमान सभी प्रतिमाएं लगभग 3000 वर्ष प्राचीन है। तीर्थोदय गोलाकोट मंदिर जी 2 किलोमीटर की दूरी पर ग्रामगोडर में अति प्राचीन मंदिर लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहां पर जब पहली बार एस.के. जैन पूर्व आई.पी.एस दिल्ली पुलिस एवं राकेश जी जैन वास्तुशास्त्री जी ने 2 अक्टूबर 2014 को निरीक्षण किया उसके बाद परम आदरणीय दानवीर श्री सत्येंद्र जैन जी राजधानी प्रोमिल के संयोग से इस क्षेत्र के विकास

हेतु राष्ट्रीय संत श्री विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य मुनि ने निरयापक व्यापक सुधासागर जी महाराज आशीर्वाद एवं प्रेरणा से अनेक-अनेक कार्य किए जा रहे हैं। यहां पूर्व आईपीएस एस.के.जैन, राकेश जी जैन (वास्तुशास्त्री) एवं सत्येंद्र जी जैन (दिल्ली राजधानी बेसन) के सहयोग से यात्रियों के लिए सर्व सुविधा युक्त 5 सितारा यात्री निवास, वातानुकूलित भोजनशाला का भी निर्माण किया गया है। राष्ट्रीय संत आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के शिष्य मुनि निर्यापक श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से ब्राजील लकड़ियों से निर्मित 25 संतकुटीरो का निर्माण यहां पर करवाया गया है। कुटीर के बीचो- बीच तालाब भी निर्मित है। 24 कुटीर तीर्थंकरों के नाम से और एक कुटीर आचार्य श्री के नाम से यहां पर निर्मित है। तीर्थोदय क्षेत्र पर विशाल नए मंदिरों का निर्माण एवं त्रिकाल चौबीसी का निर्माण गुलाबी पत्थर पर अद्वितीय कलाओं के साथ किया जा रहा है। गोलाकोट तीर्थोदय क्षेत्र मे प्रति वर्षा अनुसार 1008 भगवान आदिनाथ के जन्मोत्सव पर वार्षिक मेला एवं भव्य जल समारोह का आयोजन बड़ी ही धूमधाम से किया जाता है तीर्थोदय क्षेत्र पर मूलनायक भगवान प्रथम तीर्थंकर श्री ऋषभदेव जी अतिशय कारी पद्मासन प्रतिभा सहित अनेक प्रतिमाएं विराजमान है पुरातत्व वेदों का मानना है सभी प्रतिमाएं लगभग 3000 वर्ष प्राचीन है|

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